आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में चल रहे पितृपक्ष का समापन पितृ विसर्जनी अमावस्या के साथ हुआ। शनिवार को गोंडा जिले के करनैलगंज स्थित सरयू नदी के घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदी में स्नान कर अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सुबह चार बजे से घाट पर पहुंचने लगे श्रद्धालु
पितृ विसर्जनी अमावस्या के अवसर पर शनिवार सुबह करीब चार बजे से ही सरयू नदी के घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। लोगों ने स्नान के बाद दान-पुण्य किया और विधि-विधान से पितरों का तर्पण व पिंडदान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों को विदाई देकर उनसे अपने परिवार और वंशजों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है।
घाट पर अव्यवस्था, नदी की स्वच्छता पर उठे सवाल
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सरयू घाट पर अव्यवस्था भी देखने को मिली। कई श्रद्धालु घरों से हवन सामग्री, फूल-पत्तियां और अन्य पूजन सामग्री लाकर नदी में प्रवाहित करते नजर आए। इससे नदी की स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ी। धार्मिक आस्था के साथ नदी की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी है।
पितृ विसर्जनी अमावस्या के साथ ही पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का विशेष पर्व संपन्न हो गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी।
