मेडिकल वेस्ट के अवैध निस्तारण पर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन ने उठाए सवाल, कोल्हान में ट्रीटमेंट प्लांट की कमी पर जताई चिंता

झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (Jharkhand Human Rights Conference-JHRC) की ओर से आयोजित साप्ताहिक बैठक में मेडिकल वेस्ट यानी जैव चिकित्सा अपशिष्ट के अवैध निस्तारण का गंभीर मुद्दा उठाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों, निजी नर्सिंग होम, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी सेंटर और क्लीनिकों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का निर्धारित नियमों के अनुसार निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इससे आम लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

बैठक में संगठन की ओर से कोल्हान क्षेत्र में मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट की उपलब्धता और व्यवस्था पर सवाल उठाए गए। सम्मेलन का आरोप है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

संगठन ने चिंता जताई कि मेडिकल वेस्ट को कथित तौर पर नदियों और घरेलू कचरे के साथ फेंका जा रहा है। ऐसे अपशिष्ट में संक्रमण फैलाने वाले पदार्थ, इस्तेमाल की गई सिरिंज, पट्टियां और अन्य दूषित सामग्री हो सकती है। इनके खुले में पड़े रहने या सामान्य कचरे में मिलने से संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है।

झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन ने मेडिकल वेस्ट के संग्रह, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत बताई। संगठन का कहना है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट का निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।