उत्तराखंड: राज्य के प्रमुख तीर्थस्थलों Badrinath Temple और Kedarnath Temple में इस वर्ष से गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था धार्मिक परंपराओं और मंदिर की आस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह परंपरा आदि गुरु Adi Shankaracharya के समय से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी मानी जाती है। मंदिर से जुड़े संतों और प्रबंधन का कहना है कि तीर्थस्थलों की मर्यादा और धार्मिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार भारतीय संविधान का Article 26 of the Constitution of India हर धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है। इसी अधिकार के तहत मंदिर प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है।
हालांकि इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा और बहस भी शुरू हो गई है। वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।









