नई दिल्ली ; संसद में नेता Raghav Chadha ने कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके चारों ओर जो कलंक है वह समाज की विफलता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई लड़की स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि सैनिटरी पैड, पानी और गोपनीयता की सुविधा नहीं है, तो यह उसकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि हमारा सामूहिक संकट है।
राघव चड्ढा ने कहा कि आज भी हमारे देश में शराब और सिगरेट खुले तौर पर बिकते हैं, लेकिन सैनिटरी पैड को अखबार में लपेट कर छुपाया जाता है। उन्होंने कहा, “एक वैज्ञानिक तथ्य को समाज ने सामाजिक वर्जनाओं में बदल दिया है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि मासिक स्वच्छता कोई दया या अतिरिक्त सुविधा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता और गरिमा का मुद्दा है। राघव चड्ढा ने कहा कि यह मुद्दा भारत की 35 करोड़ महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि जब हर लड़की बिना कलंक के स्कूल जा सकेगी और गरिमा के साथ जी सकेगी, तभी हमारा समाज वास्तव में प्रगतिशील कहला सकेगा।








