आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान: युद्ध स्वार्थ का परिणाम, दुनिया को चाहिए शांति और सद्भाव !

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नागपुर:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध और वैश्विक संघर्ष अक्सर स्वार्थ, वर्चस्व की भावना और संकीर्ण हितों का परिणाम होते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया को टकराव नहीं, बल्कि शांति, सद्भाव और आपसी सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि स्थायी शांति केवल विचारों से नहीं, बल्कि व्यवहार में मानवीय मूल्यों, अनुशासन और आपसी सम्मान को अपनाने से स्थापित हो सकती है। उनके अनुसार, समाज और विश्व में संतुलन तब ही संभव है जब राष्ट्र और समुदाय संघर्ष के बजाय सहयोग का मार्ग चुनें।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की सांस्कृतिक सोच हमेशा विश्व बंधुत्व, सह-अस्तित्व और समरसता का संदेश देती रही है। भागवत ने कहा कि यदि दुनिया आपसी समझ और सद्भाव के रास्ते पर आगे बढ़े, तो वैश्विक स्तर पर स्थिरता और शांति कायम की जा सकती है।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में उनका संदेश शांति, संतुलन और मानवीय एकता की जरूरत को रेखांकित करता है।

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Author: office

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