झारखंड के रामगढ़ जिले में आयोजित अबुआ संथाल समाज “भारत दिशोम” कार्यक्रम आदिवासी समाज के एक बड़े महाकुंभ के रूप में उभरा। इस आयोजन में झारखंड, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा समेत देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में संथाली समाज के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज को उनके हक, अधिकार, संस्कृति और सामाजिक पहचान के प्रति जागरूक करना तथा समाज में एकजुटता का संदेश देना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अबुआ संथाल समाज भारत दिशोम के केंद्रीय अध्यक्ष Vinod Kisku ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक विकास के मुद्दों पर संगठित होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह महाकुंभ समाज की एकता और जागरूकता का प्रतीक है।
वहीं असम प्रदेश अध्यक्ष Narayan Murmu ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासियों को एक मंच पर लाने का यह प्रयास समाज में नई ऊर्जा और चेतना का संचार करेगा। उन्होंने सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
बिहार प्रदेश अध्यक्ष Manoj Murmu ने युवाओं से शिक्षा, नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की ताकत उसकी एकजुटता में है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर रखना होगा।
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केंद्र और राज्य सरकारों तक यह संदेश पहुंचाने का माध्यम है कि आदिवासी समाज अब अपने अधिकारों और विकास के सवालों को लेकर पहले से अधिक जागरूक और संगठित है।
आयोजकों के अनुसार, यह महाकुंभ केवल एक सामाजिक सम्मेलन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकता, जागरूकता और अधिकारों के प्रति बढ़ती चेतना का बड़ा शंखनाद है। कार्यक्रम के अंत में समाज के विकास, शिक्षा के प्रसार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया।
