झारखंड के रामगढ़ जिले स्थित पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) में आयोजित द्वितीय ऐश यूजर मीट–2026 में फ्लाई ऐश (राख) के प्रभावी उपयोग और “ऐश टू एसेट” की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य विषय था—“अपशिष्ट से समृद्धि तक: एक सतत और सशक्त यात्रा”।
कार्यक्रम में बताया गया कि फ्लाई ऐश अब केवल औद्योगिक अपशिष्ट नहीं, बल्कि देश के लिए एक बहुमूल्य संसाधन बन चुकी है। आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से इसका उपयोग सड़क निर्माण, सीमेंट, ईंट निर्माण और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिल रही है।
इस अवसर पर PVUNL के सीईओ ए.के. सहगल ने कहा कि “ऐश टू एसेट” की अवधारणा पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वहीं एनएचएआई रांची के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विजय कुमार ने सड़क निर्माण सहित विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में फ्लाई ऐश के बढ़ते उपयोग और इसके लाभों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, सरकारी एजेंसियों और ऐश उपयोगकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित कर फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देना तथा ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के लक्ष्य को साकार करना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय लाभ और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
