पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में ऐतिहासिक कालीबाग मंदिर परिसर की खाली जमीन पर पार्क निर्माण की योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम की ओर से प्रस्तावित पार्क निर्माण का स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध किया। बुधवार को टेंडर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक नगर निगम सभागार पहुंच गए और योजना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
स्थानीय लोगों ने पार्क निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए नगर निगम से टेंडर प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने महापौर गरिमा देवी सिकारिया के खिलाफ भी नारेबाजी की। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब लोगों ने नगर निगम का मुख्य गेट घंटों बंद रखा।
कालीबाग मंदिर बेतिया का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल माना जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना महाराजा हरेंद्र किशोर ने कराई थी। मंदिर परिसर की खाली जमीन पर पार्क बनाने की नगर निगम की योजना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर से जुड़ी जमीन के उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों की राय भी ली जानी चाहिए। लोगों ने मांग की कि पार्क निर्माण से पहले जमीन के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखा जाए। इसी मांग को लेकर बुधवार को लोग नगर निगम कार्यालय पहुंचे और अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
टेंडर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से नगर निगम परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद बेतिया के एसडीओ और पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। प्रशासन की मौजूदगी में लोगों की शिकायतों और मांगों को सुना गया।
स्थानीय लोगों और नगर निगम के बीच पार्क निर्माण को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद अब इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर नगर निगम की ओर से क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से पार्क निर्माण की योजना बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग मंदिर परिसर की जमीन के इस्तेमाल को लेकर विरोध जता रहे हैं।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों की मांग और नगर निगम की योजना के बीच आगे क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
