स्वामी विवेकानंद मैदान में मंगलवार को आयोजित करम महोत्सव 2026 में झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की मनमोहक झलक देखने को मिली। महोत्सव का खास आकर्षण उस समय रहा, जब उपायुक्त अजय नाथ झा ने स्वयं पारंपरिक मांदर बजाकर करम पर्व के उत्सव में सहभागिता की। उनके साथ पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ करम (करमी) डाली की पूजा-अर्चना की गई। मांदर की थाप, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। ग्रामीणों ने पारंपरिक लोटा-पानी से अतिथियों का स्वागत किया।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव का पर्व है करम
अपने संबोधन में उपायुक्त अजय नाथ झा ने जिलेवासियों, विशेषकर बहनों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व झारखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश देता है।
उपायुक्त ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक मूल्यों को सहेजना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जीवनशैली और परंपराओं में जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के संरक्षण की महत्वपूर्ण सीख निहित है।
उन्होंने लोगों से अपनी लोक संस्कृति, भाषा, परंपराओं और पर्व-त्योहारों को संरक्षित रखने तथा युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की अपील की।
सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का माध्यम
डीसी ने कहा कि करम जैसे आयोजन केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में भाईचारे और सामुदायिक एकजुटता को भी मजबूती मिलती है।
महोत्सव के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। मांदर की थाप पर कलाकारों और ग्रामीणों ने पारंपरिक उत्सव में सहभागिता की। पूरे कार्यक्रम के दौरान झारखंडी संस्कृति और लोक परंपराओं का रंग देखने को मिला।
कार्यक्रम में एसपी नाथू सिंह मीणा, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, एसडीओ बेरमो मनोज कुमार, बीडीओ मुकेश कुमार, सीओ संजीत कुमार सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
करम महोत्सव के माध्यम से एक ओर जहां झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक विरासत की झलक देखने को मिली, वहीं लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को समझने का संदेश भी मिला।
