मछली पालन से स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे पाबौ के राजेंद्र चमोली

उत्तराखंड में ग्रामीण आजीविका और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच पौड़ी गढ़वाल के पाबौ विकासखंड के बिडोली गांव निवासी राजेंद्र चमोली मछली पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से मछली उत्पादन से जुड़े राजेंद्र ने इस व्यवसाय को अपनी आय का बेहतर माध्यम बनाया है।

मत्स्य विभाग के सहयोग से शुरू हुई राजेंद्र चमोली की यह पहल अब सात तालाबों तक पहुंच चुकी है। इन तालाबों में पंगास और ग्रास कार्प मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है। राजेंद्र के अनुसार, मछली पालन से उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का अवसर मिला है।

खास बात यह है कि राजेंद्र ने अपने इस व्यवसाय से तीन महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे उन्हें भी स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिल रहा है।

राजेंद्र वर्ष में दो से तीन बार मछली उत्पादन कर स्थानीय बाजार में इसकी बिक्री करते हैं। उनका कहना है कि मत्स्य पालन को व्यवस्थित तरीके से अपनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

राजेंद्र चमोली की यह पहल उन ग्रामीण युवाओं और लोगों के लिए उदाहरण बन रही है, जो पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के नए विकल्प तलाश रहे हैं।