विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान महाराष्ट्र के गोंदिया से चांगरोड़िया परिवार अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंचा है। परिवार की ओर से 17 दिनों तक पिंडदान और श्राद्ध कर्मकांड किया जा रहा है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, गयाजी में पिंडदान करने की उनकी परंपरा करीब 140 वर्ष पुरानी है।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि चांगरोड़िया परिवार प्रत्येक दस वर्ष में विशेष रूप से गयाजी पहुंचकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान करता है। इस बार भी परिवार धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए गयाजी आया है।
वर्ष 1886 से जुड़ी है परंपरा
चांगरोड़िया परिवार के सदस्यों के अनुसार, गयाजी में पिंडदान करने की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1886 में हुई थी। उस समय परिवार के पूर्वज हरियाणा से पैदल यात्रा कर गयाजी पहुंचे थे। तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती आ रही है।
परिवार के लिए गयाजी की यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पारिवारिक विरासत को संजोने का अवसर भी है।
होटल सिटी सूर्य में मनाई पितृ दिवाली
17 दिवसीय पिंडदान कार्यक्रम के बीच चांगरोड़िया परिवार ने होटल सिटी सूर्य में धूमधाम से पितृ दिवाली मनाई। इस दौरान पूजा-अर्चना की गई और धार्मिक अनुष्ठान के बाद आतिशबाजी भी हुई। परिवार के सदस्यों ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी पुरानी परंपरा और आस्था को जीवंत रखा।
पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध करने गयाजी पहुंचते हैं। चांगरोड़िया परिवार की यह यात्रा पुरानी धार्मिक परंपराओं के प्रति श्रद्धा और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का उदाहरण है।
