दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस समय महंगाई (इन्फ्लेशन) और संभावित मंदी (रिसेशन) के दोहरे दबाव से जूझ रही हैं। कई देशों में बढ़ती कीमतों, ऊंची ब्याज दरों और धीमी आर्थिक वृद्धि ने बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड के बाद आर्थिक रिकवरी की रफ्तार, सप्लाई चेन में आई बाधाएं, और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने महंगाई को बढ़ावा दिया है। इसके जवाब में केंद्रीय बैंकों—जैसे Federal Reserve और European Central Bank—ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं, जिससे कर्ज महंगा हुआ और निवेश पर असर पड़ा है।








