रामगढ़ जिले के कुजू क्षेत्र में स्थित लगभग 120 वर्ष पुरानी मंदिर और मस्जिद आज भी सांप्रदायिक सौहार्द, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। एक ही परिसर में स्थित दोनों धार्मिक स्थलों ने वर्षों से सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया है।
ईद-उल-अजहा के अवसर पर मस्जिद में नमाज अदा की गई, वहीं मंदिर परिसर में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देकर आपसी भाईचारे का परिचय दिया।
स्थानीय निवासी शकील खान ने बताया कि झारखंड में यह स्थान इतिहास और सौहार्द का प्रतीक है, जहां मंदिर और मस्जिद वर्षों से साथ-साथ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग हमेशा प्रेम, अमन और भाईचारे के साथ रहते आए हैं और आगे भी इसी परंपरा को कायम रखेंगे। उन्होंने देशवासियों से भी आपसी सौहार्द और एकता बनाए रखने की अपील की।
वहीं मंदिर समिति से जुड़े कामेश्वर पांडे ने कहा कि यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के पर्व और खुशियों में शामिल होते हैं, जो भारतीय संस्कृति की असली पहचान है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बदलते दौर में भी यह मंदिर-मस्जिद परिसर समाज को एकता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दे रहा है। यही वजह है कि यह स्थल आज भी गंगा-जमुनी संस्कृति की जीवंत पहचान बना हुआ है।
