देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है।
कई राज्यों में जलाशयों और बांधों में जल संग्रहण की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ने की संभावना जताई है, लेकिन किसान और प्रशासन मानसून की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मानसून का प्रदर्शन कृषि उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य महंगाई पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।