नालंदा की ऐतिहासिक विरासत से प्रभावित हुए राज्यपालह्वेन त्सांग स्मारक के विकास का किया ऐलान

नालंदा, बिहार विश्व प्रसिद्ध नालंदा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार को नव नालंदा महाविहार के सांस्कृतिक परिसर स्थित ह्वेन त्सांग स्मारक का भ्रमण किया और इसकी ऐतिहासिक महत्ता की सराहना की।

इस अवसर पर नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए उन्हें प्राचीन नालंदा की प्रतिकृति मुहर भेंट कर सम्मानित किया।

भ्रमण के दौरान कुलपति ने राज्यपाल को चीनी बौद्ध यात्री एवं महान विद्वान आचार्य ह्वेन त्सांग के जीवन, भारत यात्रा, नालंदा में उनके अध्ययन, तथा बौद्ध दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार में उनके योगदान की विस्तृत जानकारी दी।

स्मारक का अवलोकन करने के बाद राज्यपाल ने इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता की प्रशंसा करते हुए ह्वेन त्सांग स्मारक के समग्र विकास और संरक्षण का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि नालंदा केवल बिहार या भारत की धरोहर नहीं, बल्कि विश्व की साझा सांस्कृतिक विरासत है, जिसे संरक्षित और वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने भारत और चीन के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को मजबूत बनाने में नालंदा और ह्वेन त्सांग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी साझा जिम्मेदारी है।

इस दौरे को नालंदा की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।