पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज स्थित ई-किसान भवन में आयोजित उर्वरक निगरानी समिति की बैठक उस समय हंगामेदार हो गई, जब धान रोपनी के पीक सीजन में यूरिया की किल्लत और डीलरों की कथित मनमानी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। बैठक में खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने थोक डीलरों पर निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर यूरिया उपलब्ध कराने और अन्य उत्पाद जबरन खरीदवाने का आरोप लगाया।
बैठक में खुदरा विक्रेताओं का कहना था कि उन्हें यूरिया के एक पैकेट के लिए 345 से 350 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, हर यूरिया पैकेट के साथ 150 से 200 रुपये कीमत की कृषि दवाइयां, जैसे ‘अपना पावर’ और जिंक, भी अनिवार्य रूप से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे किसानों और खुदरा दुकानदारों दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
विक्रेताओं ने समिति के समक्ष इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी थोक डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि धान रोपनी के महत्वपूर्ण समय में यूरिया की कमी और कथित अनियमितताओं से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं किसानों ने भी समय पर पर्याप्त मात्रा में उचित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि खेती का कार्य प्रभावित न हो।
