भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये की कमजोरी का प्रमुख कारण बन रही हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया हाल के दिनों में दबाव में रहा है, जिससे आयात लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर पड़ सकता है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर सकता है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होने पर रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।