पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पोलो मैदान पर प्रस्तावित नरेंद्र मोदी की सभा से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। सभा से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भाजपा के पश्चिम बर्धमान जिला के जनरल सेक्रेटरी केशव पोद्दार ने आरोप लगाया कि कुलटी विधानसभा क्षेत्र से हजारों लोगों को सभा में लाने के लिए बुक की गई करीब 200 बसों को तृणमूल कांग्रेस के दबाव में कैंसल करा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि बस मालिकों को एडवांस में दी गई राशि भी लौटाने के लिए मजबूर किया गया।
केशव पोद्दार ने इसे “प्रतिहिंसा की राजनीति” बताते हुए कहा कि कुलटी क्षेत्र में इस तरह की घटना पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल से जुड़े श्रमिक संगठनों ने बस मालिकों को धमकी दी कि यदि उन्होंने भाजपा समर्थकों को सभा में ले जाने के लिए बसें दीं, तो उनके वाहनों को खड़ा कर दिया जाएगा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
वहीं, इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार किया है। तृणमूल के श्रमिक नेता राजू अहलुवालिया ने सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि जिन बसों की बात की जा रही है, वे तृणमूल से जुड़े श्रमिकों और यूनियनों द्वारा संचालित हैं और वे अपनी मर्जी से निर्णय ले रहे हैं।
इस बीच भाजपा के राज्य स्तरीय नेता और सभा प्रभारी कृष्णेंदु मुखर्जी ने भी कहा कि उन्हें बस बुकिंग रद्द होने की जानकारी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस मालिकों को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री की सभा में भारी भीड़ उमड़ेगी।
उन्होंने कहा कि यह देश के प्रधानमंत्री की सभा है और जनता खुद इसमें शामिल होगी। साथ ही उन्होंने कोलकाता के ब्रिगेड मैदान की पिछली रैली का उदाहरण देते हुए कहा कि इस बार भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। जहां भाजपा इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रही है।
फिलहाल, सभी की नजरें गुरुवार को होने वाली प्रधानमंत्री की सभा पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन विवादों के बीच सभा में कितनी भीड़ जुटती है और इसका चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ता है।











