संथाल समाज दिशोम मांझी परगना का 30वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

रामगढ़ जिले के कुजू मुरपा स्थित अक्षत बैंक्विट हॉल में संथाल समाज दिशोम मांझी परगना का 30वां स्थापना दिवस पारंपरिक हर्षोल्लास और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए आदिवासी महिला-पुरुष अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और ढोल, नगाड़े तथा झांझर की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा उपस्थित रहे। समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का पगड़ी पहनाकर तथा अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सखुआ की डाल स्थापित कर किया गया। इसके बाद वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धू-कानू और चांद-भैरव के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बनाए रखने पर जोर देते हुए युवाओं से अपने इतिहास और विरासत को सहेजने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि फागू बेसरा ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकता में निहित है। उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती के माध्यम से विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का आह्वान किया।

स्थापना दिवस समारोह में समाज के गणमान्य लोग, मांझी-परगना प्रतिनिधि, युवा, महिलाएं और विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।