बलिया जनपद के शंकरपुर गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां विकास परियोजना किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। जिले के प्रसिद्ध कटहल नाले के सुंदरीकरण कार्य के चलते नाले का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो गया है, जिससे आसपास के गांवों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। किसानों का आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी खेती और आजीविका दोनों संकट में पड़ गई हैं।कटहल नाले के सुंदरीकरण कार्य के कारण 27 गांवों का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है और खेतों में जमा हो रहा है। इसके चलते सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। खेतों में खड़ी फसलें सड़ गई हैं और नई बुआई का काम भी पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। प्रशासन द्वारा नाले की सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
सुरहा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि हजारों एकड़ भूमि अप्राकृतिक जलभराव के कारण डूबी हुई है और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इस वर्ष भी भारी नुकसान की आशंका है। किसानों के अनुसार कटहल नाला जल निकासी का एकमात्र प्राकृतिक माध्यम है, जो पूरी तरह जाम पड़ा हुआ है।
इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र के वरिष्ठ किसानों की एक प्रतिनिधिमंडल बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई गई। किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि फसलों और किसानों की आजीविका को बचाया जा सके।
किसानों का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता।
