देश में लगातार घटती जन्मदर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण, बढ़ती शिक्षा, करियर प्राथमिकताएं और जीवनशैली में बदलाव जैसे कई कारण परिवारों के आकार को प्रभावित कर रहे हैं।
यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई विकसित और विकासशील देशों में भी जन्मदर में गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी रही तो भविष्य में श्रमशक्ति, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास पर इसका असर पड़ सकता है। इस विषय पर विश्व स्तर पर नीतिगत चर्चाएं जारी हैं।