भासा के आह्वान पर दूसरे दिन भी ओपीडी बंद, गंभीर मरीजों के साथ बुजुर्ग और बच्चे भी परेशान; इमरजेंसी में बढ़ा मरीजों का दबाव
आरा। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण आरा सदर अस्पताल में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन ओपीडी सेवा बंद रही। इलाज की उम्मीद में सुबह अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार और भटकने के बाद निराश होकर लौटना पड़ा। ओपीडी के बाहर मरीज डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर रहने के कारण उन्हें सामान्य इलाज की सुविधा नहीं मिल सकी।
ग्रामीण इलाकों से बस और अन्य साधनों से सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। कई मरीजों ने बताया कि अस्पताल आने-जाने में किराया खर्च करने के बाद यहां पहुंचने पर ओपीडी बंद होने की जानकारी मिली। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
गंभीर मरीज, बुजुर्ग और बच्चे भी परेशान
हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई, जो पहले से गंभीर बीमारी, चोट या लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य समस्या से परेशान हैं। बुजुर्ग मरीज भी इलाज के लिए अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते नजर आए। ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रही और इलाज को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही।
मरीजों का कहना था कि हड़ताल का सीधा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है। हालांकि इमरजेंसी सेवा जारी है, लेकिन ओपीडी बंद रहने के कारण सामान्य मरीजों का दबाव भी इमरजेंसी विभाग पर बढ़ गया है।
40 किलोमीटर दूर से आए दिव्यांग को नहीं मिला इलाज
भोजपुर के गौरा बाजार से करीब 40 किलोमीटर दूर से इलाज कराने पहुंचे राज कुमार ने बताया कि वे दोनों पैरों से दिव्यांग हैं और करीब डेढ़ महीने से पैर में सूजन की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि गांव से सदर अस्पताल आने-जाने में करीब 200 रुपये खर्च हो जाते हैं।
राज कुमार के मुताबिक, वह गुरुवार को भी इलाज के लिए अस्पताल आए थे, लेकिन इलाज नहीं हो सका। शुक्रवार को दोबारा अस्पताल पहुंचने पर भी ओपीडी बंद मिली। उन्होंने बताया कि बाहर से दवा लेने की सलाह दी जा रही है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निजी डॉक्टर की फीस और बाहर से दवा खरीदने का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल है।
उन्होंने सरकार से गरीब मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में बेहतर और नियमित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
सिरदर्द से परेशान बुजुर्ग महिला भी लौटी
ओपीडी के बाहर करीब 15 किलोमीटर दूर से आई बुजुर्ग महिला दुलरमानो कुंवर इलाज का इंतजार करती नजर आईं। उन्होंने बताया कि सिर में काफी दर्द है, लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है। महिला ने कहा कि अस्पताल आने के बाद भी उन्हें डॉक्टर से दिखाने का मौका नहीं मिला।
घायल बेटे को गोद में लेकर भटकते रहे पिता
इसी दौरान राज कुमार चौधरी अपने घायल बेटे को गोद में लेकर अस्पताल में इलाज के लिए भटकते दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि बेटे के पैर में चोट लगने के बाद फ्रैक्चर हो गया है। उनके अनुसार हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं थे और उन्हें सोमवार को आने के लिए कहा गया।
राज कुमार चौधरी ने सवाल उठाया कि घायल मरीज की स्थिति खराब होने के बावजूद उसे इलाज के लिए कई दिन बाद बुलाया जा रहा है।
इमरजेंसी में बढ़ा मरीजों का दबाव
इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर ऋषि ने बताया कि इमरजेंसी सेवा के लिए तीन डॉक्टरों की तैनाती है। ओपीडी बंद होने के कारण इमरजेंसी में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। डॉक्टर के अनुसार पहले गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है और इसके बाद सामान्य मरीजों को भी देखा जा रहा है।
लगातार दूसरे दिन ओपीडी बंद रहने से सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने जल्द से जल्द नियमित ओपीडी सेवा बहाल होने की उम्मीद जताई।
