मधुबनी पुलिस ने सिम पोर्ट की आड़ में साइबर ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। जिला साइबर थाना और भेजा थाना की संयुक्त कार्रवाई में सीएससी सेंटर संचालक नीलकमल महतो को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी भेजा थाना क्षेत्र के दलदल गांव का निवासी है। पुलिस ने उसके पास से कई डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं।
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) योगेन्द्र कुमार ने बताया कि आरोपी सीएससी सेंटर की आड़ में सिम पोर्टिंग का काम करता था। इसी दौरान उसने एक बुजुर्ग जयभद्र राय के बैंक खाते से 45 हजार रुपये की ठगी कर ली। घटना का खुलासा तब हुआ जब बुजुर्ग अपनी पेंशन की राशि निकालने के लिए उसकी दुकान पर पहुंचे।
एसपी के अनुसार, आरोपी सिम पोर्ट कराने के दौरान ग्राहकों से ओटीपी हासिल कर लेता था। इसके बाद संबंधित सिम को अपने नियंत्रण में सक्रिय कर बैंक खातों तक पहुंच बनाता और पैसे निकाल लेता था। पुलिस को उसके खिलाफ लगातार शिकायतें और गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इसके आधार पर साइबर थाना और भेजा थाना की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने साइबर ठगी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि पोर्टिंग कोड जारी करने की प्रक्रिया में कहीं दूरसंचार सेवा प्रदाता की ओर से लापरवाही तो नहीं हुई।
एसपी ने कहा कि मामले में संबंधित कंपनी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो कानूनी कार्रवाई और जुर्माने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुलिस के अनुसार, बिहार में इस प्रकार का यह पहला सिम-स्वैप साइबर फ्रॉड मामला माना जा रहा है। इससे पहले कर्नाटक, हैदराबाद, बेंगलुरु और गुजरात जैसे राज्यों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां साइबर अपराधियों ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया था।
मधुबनी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सिम पोर्टिंग या किसी भी डिजिटल सेवा के दौरान अपना ओटीपी, बैंकिंग जानकारी और व्यक्तिगत विवरण किसी के साथ साझा न करें
