सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि निर्धारित फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित करना राज्य और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। न्यायालय ने केंद्र, राज्यों और शहरी निकायों को फुटपाथों के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी नियामक व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पैदल चलने वालों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फुटपाथों पर अवैध कब्जे और खराब रखरखाव के कारण नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है। न्यायालय के इस फैसले को शहरी विकास और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।