जमुआ गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड में कथित अनाज कालाबाजारी मामले की जांच अब तेज हो गई है। लगातार तीन दिनों से सामने आ रही अनियमितताओं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों के बाद राज्य स्तरीय जांच टीम जमुआ पहुंची। टीम ने जमुआ और भारडीह स्थित खाद्यान्न गोदामों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड, स्टॉक और वितरण व्यवस्था की गहन जांच की।
जानकारी के अनुसार जांच टीम ने गोदामों में रखे खाद्यान्न, अभिलेखों तथा उठाव और वितरण से जुड़े दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया। हाल के दिनों में आरोप लगाए गए थे कि बिना गोदाम प्रबंधक की मौजूदगी के अनाज का उठाव किया जा रहा था। इसके अलावा बिना चालान के देर रात ट्रकों में खाद्यान्न लोड कर अन्य स्थानों पर भेजे जाने की भी चर्चा सामने आई थी।
इन आरोपों के सामने आने के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को मिलने वाला राशन यदि कालाबाजारी की भेंट चढ़ रहा है तो यह गरीब कार्डधारियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
जांच के दूसरे दिन जब मीडिया प्रतिनिधियों ने राज्य स्तरीय जांच टीम से जांच की प्रगति और संभावित निष्कर्षों के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। टीम के अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट सीधे उनके उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी और फिलहाल इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।
इस दौरान राज्य स्तरीय जांच टीम के साथ जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी तेज कुमार हसदा भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में गोदामों के स्टॉक, रिकॉर्ड और परिवहन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई।
जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से क्षेत्र के गरीब राशन कार्डधारियों और आम लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों को आशंका है कि कहीं यह मामला भी अन्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में उलझकर ठंडे बस्ते में न चला जाए।
फिलहाल पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों और लाभुकों की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी तथा गरीबों के हक की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल जांच जारी है और प्रशासनिक रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
