इंसानियत की मिसाल: धनबाद में तीन पैर और एक आंख वाले वफादार ‘सियारो’ को गाजे-बाजे के साथ दी गई अंतिम विदाई, याद में हुआ विशाल भंडारा

इंसान और बेजुबान जानवरों के बीच प्रेम, वफादारी और संवेदना की एक अनूठी मिसाल धनबाद के बरमसिया से सामने आई है। यहां बरमसिया रेलवे कॉलोनी के निवासियों ने अपने प्रिय आवारा कुत्ते ‘सियारो’ की मौत पर ऐसा भावुक आयोजन किया, जिसने इंसानियत और जीवों के प्रति प्रेम का संदेश दिया।

शारीरिक रूप से दिव्यांग सियारो के तीन पैर और केवल एक आंख थी, लेकिन इसके बावजूद उसने अपनी वफादारी और निस्वार्थ प्रेम से पूरे मोहल्ले के लोगों का दिल जीत लिया था। करीब 10 वर्षों तक उसका कॉलोनी के लोगों के साथ खास रिश्ता बना रहा। स्थानीय निवासी उसे परिवार के सदस्य की तरह मानते थे।

सियारो की मौत से कॉलोनी के लोग बेहद दुखी हो गए। उसके प्रति अपने प्रेम और सम्मान को जाहिर करते हुए लोगों ने गाजे-बाजे के साथ संगीतमय श्रद्धांजलि दी और पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इतना ही नहीं, उसकी याद में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

स्थानीय निवासी सुरेश सिंह उर्फ मुन्ना सहित कॉलोनी के लोगों ने सियारो के साथ बिताए पलों को याद किया। लोगों का कहना है कि सियारो केवल एक आवारा कुत्ता नहीं था, बल्कि वह पूरे मोहल्ले का प्यारा साथी बन चुका था।

बरमसिया रेलवे कॉलोनी की यह पहल बताती है कि प्रेम और वफादारी की कोई भाषा या सीमा नहीं होती। एक बेजुबान जानवर भी अपने व्यवहार से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बना सकता है, जिसे उसकी विदाई के बाद भी भुलाया नहीं जा सकता।