बिहार नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक के पास, पटरी से सटे जंगलनुमा इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक आग की डरावनी लपटें आसमान की ओर उठने लगीं। देखते ही देखते सूखे पत्तों और कचरे से उठी आग ने हवा का सहारा लिया और झाड़ियों व पेड़ों को निगलती चली गई, मानो पूरा इलाका आग का समंदर बन गया हो। दूर-दूर तक धुएं का काला गुबार छा गया और लपटें इतनी तेज़ थीं कि उन्हें कई सौ मीटर दूर से भी देखा जा सकता था। आग का रूप इतना विकराल हो चुका था कि किसी भी पल बड़ा हादसा होने का खतरा मंडरा रहा था। हालांकि राहत की बात यह रही कि आग स्टेशन परिसर तक नहीं पहुंची और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही आरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे और जान जोखिम में डालकर मोर्चा संभालते हुए आग से जूझ पड़े। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया गया और एक बड़ा खतरा टल गया।
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